कुछ कभी दर्द से सिवा न मिला

इश्क़ भी उन से बा-वफ़ा न मिला

ए'तिबार इतना उस पे था सब को
वो कहीं पर भी बे-वफ़ा न मिला

फिर मुझे भी ख़ुदा में वो न मिला
और मुझ में उसे ख़ुदा न मिला

लम्हा भर दिल ये मुतमइन न हुआ
इक नज़र उस को देखना न मिला

अहद सब ने किए हैं मिलने के
हम से जो भी बिछड़ गया न मिला

यूँ रहा तुर्श कातिब-ए-तक़दीर
जो भी कुछ मिलने को हुआ न मिला

वो हमारा जो हो के भी न हुआ
एक ही बात है मिला न मिला

रह में उन की मैं यूँ रहा हाइल
रास्ते को भी रास्ता न मिला

ना-मुयस्सर रहा हमें हर लुत्फ़
नेकी से कोई फ़ाइदा न मिला

— Muntazir shrey

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