
सूरत समझ नहीं पाए पर ढंग बदलते देखा है
हम ने इंसानो को अपने अंग बदलते देखा है
जैसे गिरगिट रंग बदल कर छुप जाता है पेड़ो में
हम ने भी कुछ लोगों को यूँ रंग बदलते देखा है
— Naimish trivedi
Other sher from the same pen
Shers of adaa.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling