ख़्वाब

ये ख़्वाब हैं जो आँखों आँखों में पल जाते हैं
ये ख़्वाब हैं जो शाम से ढल जाते हैं
ये ख़्वाब हैं जो ज़मीं से लगते हैं
ये ख़्वाब हैं जो यक़ीं से लगते हैं
ये ख़्वाब हैं जो कभी आसमाँ जिताते हैं
ये ख़्वाब हैं जो कभी मिट्टी में मिलाते हैं
ये ख़्वाब हैं जो हमें जीना सिखाते हैं
ये ख़्वाब हैं दरिया में सफ़ीना भी बन जाते हैं
ये ख़्वाब हैं जो कि मेहनतों से चलते हैं
ये ख़्वाब हैं जो ख़ुदा की रहमतों पर पलते हैं
ये ख़्वाब हैं जिन के लिए लड़ना पड़ता है
ये ख़्वाब हैं,रातों रातों जागना पड़ता है
ये ख़्वाब हैं जो मयख़ाने चलाते हैं
ये ख़्वाब हैं जो पैमाने बताते हैं
ये ख़्वाब हैं जो कभी महँगे हो जाते हैं
ये ख़्वाब हैं जो कभी कौड़ियों में बिक जाते हैं
ये ख़्वाब हैं माँ के चेहरे पर ख़ुशियाँ ले कर आते हैं
ये ख़्वाब हैं हम कौन हैं हमें बताते हैं
ये ख़्वाब हैं के शौक़ नवाबी हैं
ये ख़्वाब हैं जो हाज़िर जवाबी हैं
ये ख़्वाब हैं जो तेरे मेरे हिस्से आते हैं
ये ख़्वाब हैं बन कर कहानी क़िस्से आते हैं

— Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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