जो तुम होगी तो मैं हूॅंगा जो हम होंगे तो घर होगा

कहाँ तो मान बैठे थे के अपना इक नगर होगा

किसी विनती के कंधे पर सुधा रोती है चंदर की
किसी बाला के कंधे पर किसी चन्दन का सर होगा

अरी ख़्वाहिश! वहाँ जाते हुए क्यूँ मर नहीं जाती
तुझे मालूम है मुफ़लिस पे इस का क्या असर होगा

तुझे ग़म था शराबों ने समूचा घर जला डाला
ज़रा सोचो के बच्चों का गुज़ारा कैसे कर होगा

मैं यूँ ही मर्सिये गाते हुए मर भी गया गर तो
यहाँ है इल्म किस को कौन रोता उम्र भर होगा

— Nirmal Ehsaas

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