वो इंसाॅं कैसे हो सकता जिसे इंसाॅं से नफ़रत हैवो मज़हब क्या न जिसमें बाइस-ए-अम्न-ओ-मोहब्बत हैकहाँ जन्नत मिलेगी उन को जो हैं अम्न के क़ातिलये मासूमों पे हैबत किस पयम्बर वाली उम्मत है— Nityanand Vajpayee