"कुछ लिखा है मैं ने"

कुछ लिखा है मैं ने इजाज़त हो तो सुनाऊँ क्या
तुम्हारे कानों मैं अपने अधरों से कुछ गुनगुनाऊँ क्या

तुम्हें देख कर मिलता है इस दिल को सुकून
तुम्हारी आँखों में देख कर दिल मैं उतर जाऊँ क्या

ये जो आँखें हैं तुम्हारी, सजाएंँ हैं कुछ हसीन सपने
उन सपनों में अपने सपनों का महल बनाऊँ क्या

ये जो तुम्हारे कोमल से हाँथ हैं
इन हाँथों पर अपने नाम की मेंहदी रचाऊँ क्या

कुछ लिखा है मैं ने इजाज़त हो तो सुनाऊँ क्या
तुम्हारे कानों मैं अपने अधरों से कुछ गुनगुनाऊँ क्या

— Krishna dixit

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