ये कोई न जाने कैसे होगा कब होगा
जिस रोज़ ख़ुदा की मर्ज़ी होगी तब होगा
सपने टूटे अरमाँ बिखरे रोना कैसा
जब वक़्त मुवाफ़िक़ तेरे होगा सब होगा
दिल ने उस की यादों की बज़्म सजाई है
लगता है आज तमाशा पूरी शब होगा
— Prashant Prakhar
जिस रोज़ ख़ुदा की मर्ज़ी होगी तब होगा
सपने टूटे अरमाँ बिखरे रोना कैसा
जब वक़्त मुवाफ़िक़ तेरे होगा सब होगा
दिल ने उस की यादों की बज़्म सजाई है
लगता है आज तमाशा पूरी शब होगा
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