मेरे बिन वो महफ़िल कहाँ सजाके बैठा होगा
यार परिंदा वो अब किस घर जाके बैठा होगा
हम ही एक नहीं शामिल होंगे सूची में उस की
जाने कितनों को हम ख़याल बनाके बैठा होगा
मज़ाक उस ने कितनों का है इश्क़ बनाया होगा
जाने कितनों को ये खेल सिखाके बैठा होगा
कोई होगा क्या अब भी उस का लख़्त-ए-दिल जिस को
वो दिल से पंकज की तरह लगा के बैठा होगा
— Pankaj murenvi















