दिल तेरे एहसान में रोया
इश्क़ मैं तेरी शान में रोया
टूटे उन के साबुत दिल भी
मैं जिन जिन के कान में रोया
माँगी बच्ची ने भीख मुझ से
मैं मुफ़लिस बस दान में रोया
कहा किसी ने ध्यान लगाओ
ध्यान लगाकर ध्यान में रोया
पढ़ी किताब-ए-इश्क़ जो मैं ने
मैं रोने के ऐलान में रोया
भूल गए तेरे पाँव जिस को
उस शहर-ए-वीरान में रोया
कामिल हुआ नहीं जो मुझ से
इश्क़ के उस नुक़सान में रोया
— Chetan Verma















