भींगी पलकें मुस्कुराना
ख़ुश नहीं पर ख़ुश दिखाना
आ ही जाता है हुनर ये
ख़ुद को यूँ पत्थर बनाना
छीन लेता है ये बचपन
बाप का दुनिया से जाना
बोलना मत झूठ हम से
देखो कुछ भी मत छुपाना
हम नहीं जाँचेंगे तुम को
जो भी हो सच सच बताना
जानता हूँ अच्छे से मैं
तेरा हर नाटक बहाना
वैसे किस से सीखा है ये
धोखे देना दिल दुखाना
— Avijit Aman















