ki shaayad us ko mera pyaar ab achha nahin lagta | कि शायद उस को मेरा प्यार अब अच्छा नहीं लगता

  - Kabiir

कि शायद उस को मेरा प्यार अब अच्छा नहीं लगता
मैं जो कल तक था उस का यार अब अच्छा नहीं लगता

कशीदें था पढ़ा करता कभी मेरी वफ़ा के जो
मुझे कहता तिरा किरदार अब अच्छा नहीं लगता

अरे जो बे-वजह लड़ता कि उस को हम मना लेंगे
सुनो करना उसे तकरार अब अच्छा नहीं लगता

कभी हर शेर पर हम को ख़ुशी से दाद देता था
उसे तो कोई भी अश'आर अब अच्छा नहीं लगता

कभी जो ढूँढता था इक बहाना हम से मिलने का
हमीं से करना आँखें चार अब अच्छा नहीं लगता

उसे मैं जान से भी प्यारा था जब पास थी दौलत
अभी जो हो गया हूँ ख़्वार अब अच्छा नहीं लगता

हमेशा वक़्त बिगड़ा तो न होगा उस को समझाओ
मैं कह कह कर गया हूं हार अब अच्छा नहीं लगता

  - Kabiir

Bhai Shayari

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