बेहद अमीर लोग दिखावे को आएँगे
वो आएँगे तो बज़्म से जाने को आएँगे
जंगल का क़र्ज़ है सभी शहरी मकान पर
छिपना पड़ेगा जब वो तगादे को आएँगे
मुझ को मेरा वक़ार बचाना है उम्र भर
मरना पड़ेगा जब वो बचाने को आएँगे
जज़्बा नहीं न दिल न अदब तेरे शहर में
हम क्या कमाएँगे जो कमाने को आएँगे
धोखे से एक बाग़ से हो कर गुज़र गया
एहसान मुझ पे फूल जताने को आएँगे
— Prabhat Adhar














