wafa kya kar nahin sakte hain vo lekin nahin karte | वफ़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते

  - Prit

वफ़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते
दुआ क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते

मोहब्बत में बदन दे कर, हवस को लाज़मी कह कर
मज़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते

नया बिस्तर उन्हें रास आ चुका है तो मुझे ख़ुद से
जुदा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते

मनाना, रूठना, लड़ना, झगड़ना, 'इश्क़ करना हाए!
जी क्या क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते

दिल अपने की दे मुझ से इक ग़रीब इंसान को खैरात
भला क्या कर नहीं सकते हैं वो, लेकिन नहीं करते

करिश्में 'इश्क़ में क्या क्या नहीं हमने किए हमको
ख़ुदा क्या कर नहीं सकते हैं वो, लेकिन नहीं करते

घुटन सी दिल गली में होती है सो इन रक़ीबों को
कज़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो, लेकिन नहीं करते

बड़ा नुक़सान झेले बावला दिल जिनकी ख़ातिर "प्रीत"
नफ़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो, लेकिन नहीं करते

  - Prit

Mohabbat Shayari

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