इक दीपक जलता रहता है
बस शिकवे करता रहता है
मन की पीड़ा कम करने को
इक पंखा चलता रहता है
मेरी तन्हाई को मेरा
हँसना तक खलता रहता है
ख़ुशियाँ तो पल भर रहती हैं
पर ग़म पैहम चलता रहता है
— Pawan
बस शिकवे करता रहता है
मन की पीड़ा कम करने को
इक पंखा चलता रहता है
मेरी तन्हाई को मेरा
हँसना तक खलता रहता है
ख़ुशियाँ तो पल भर रहती हैं
पर ग़म पैहम चलता रहता है
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