जो तेरी हसरत करते हैं
हम उन से नफ़रत करते हैं
हम चाहे जैसे हों लेकिन
औरत की इज़्ज़त करते हैं
वो ही फिर लत बन जाता है
जिस को हम आदत करते हैं
जो सच्चे आशिक़ होते हैं
वो दिल से चाहत करते हैं
— Kaviraj " Madhukar"
हम उन से नफ़रत करते हैं
हम चाहे जैसे हों लेकिन
औरत की इज़्ज़त करते हैं
वो ही फिर लत बन जाता है
जिस को हम आदत करते हैं
जो सच्चे आशिक़ होते हैं
वो दिल से चाहत करते हैं
Other ghazal from the same pen
Shers of chaahat.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling