बहुत से ज़ख़्म हम ने भी सहे हैंबहुत से शे'र हैं जो अनकहे हैंबहुत से लोग हैं जो फरवरी मेंख़ुदी के साथ बस ज़िंदा रहे हैं— Kaviraj " Madhukar"