baat hai dhoke ki ijaad se pahle | बात है धोके की ईजादस पहले

  - Raj

बात है धोके की ईजादस पहले
बात है ताले की ईजादस पहले

इक आवाज़ में दौड़े आते थे लोग
बात है जूते की ईजादस पहले

मंदिर मस्जिद गिरजाघर होते थे
हर इक टीके की ईजादस पहले

दूर रखे होंगे झीलों से पत्थर
तब आईने की ईजादस पहले

लोग तजरबे से आगे तक आए
पढ़ने लिखने की ईजादस पहले

तेज़ हवा का डेरा होगा जग में
उसके झुमके की ईजादस पहले

मेरी ख़ामी पे चादर चढ़ती थी
तेरे क़िस्से की ईजादस पहले

प्यार रहा होगा लोगों में कितना
सिक्के पैसे की ईजादस पहले

अश्क छिपाना भी फ़न होता होगा
काले चश्में की ईजादस पहले

लोग लगाते होंगें अंदाज़े राज
तब दरवाज़े की ईजादस पहले

  - Raj

Religion Shayari

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