Raj
Raj
Ghazal

बात है धोके की ईजाद से पहले

बात है ताले की ईजाद से पहले

इक आवाज़ में दौड़े आते थे लोग
बात है जूते की ईजाद से पहले

मंदिर मस्जिद गिरजाघर होते थे
हर इक टीके की ईजाद से पहले

दूर रखे होंगे झीलों से पत्थर
तब आईने की ईजाद से पहले

लोग तजरबे से आगे तक आए
पढ़ने लिखने की ईजाद से पहले

तेज़ हवा का डेरा होगा जग में
उस के झुमके की ईजाद से पहले

मेरी ख़ामी पे चादर चढ़ती थी
तेरे क़िस्से की ईजाद से पहले

प्यार रहा होगा लोगों में कितना
सिक्के पैसे की ईजाद से पहले

अश्क छिपाना भी फ़न होता होगा
काले चश्में की ईजाद से पहले

लोग लगाते होंगे अंदाज़े राज
तब दरवाज़े की ईजाद से पहले

— Raj

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