राख में दबे अंगारे छू लिए
तेरे होंठों के दो किनारे छू लिए
मुझ को छूनी थी कोई दुआ
आँखों से तेरे आँखों के इशारे छू लिए
सुलझाने थे ख़ुद में उलझते रेशम
सो मैं ने गेसू तुम्हारे छू लिए
महक उठा तेरे याद से घर सारा
डाइरी में रखे फूल पुराने छू लिए
ख़ुद को चाँद समझ के पागल हो बैठा
रात जुगनू ने दो सितारे छू लिए
— Rajnish















