किसी दिल में बिठा ख़ुद को यहाँ पछता रहे हैं हम
अकेले ही अकेले दर्द अपना गा रहे हैं हम
यही जो नज़्म अब भाई पढ़े जो जा रहे हो तुम
नहीं है नज़्म, ये है दर्द अब बतला रहे हैं हम
ग़ज़ल की भी झलक शायद उभर आख़िर रही है अब
गए है यार हम पगला यहाँ तुतला रहे हैं हम
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