sahi men yaar ye marji usii ki hai jidhar jaa.e | सही में यार ये मर्ज़ी उसी की है, जिधर जाए

  - Raunak Karn

सही में यार ये मर्ज़ी उसी की है, जिधर जाए
गुज़ारे ज़िंदगी या फिर यहाँ दिल से गुज़र जाए

लगेगा तो नहीं दिल यार उसके दूर जाने से
उसी का मन जहाँ जाए नहीं तो फिर ठहर जाए

मिले है यार हाँ मौके सुधरने के यहाँ दिल को
समझ में बात आ जाए, सभी हाँ फिर सुधर जाए

सभी को यार अपने से यहाँ मतलब रहे है अब
नहीं पड़ता किसी को फ़र्क़ चाहे भू बिगड़ जाए

  - Raunak Karn

Dost Shayari

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