आज ये कल वो डगर करते नहीं
मुफ़लिसी में हम सफर करते नहीं
'उम्र छोटी थी वगरना यार हम
'इश्क़ तुम सेे इस कदर करते नहीं
गर पता होता हमें अंजाम तो
हम नज़र अपनी उधर करते नहीं
'इश्क़ दो तरफ़ा रहा होता तो हम
आँख अपनी तर-बतर करते नहीं
ज़िंदगी गर जो सुनाती लोरियाँ
मौत तुझको हम ख़बर करते नहीं
'वीर' चाहत से अगर मिलता कोई
हम दुआ शाम-ओ-सहर करते नहीं
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