पत्थर को पिघला सकता हूँ

सूखा फूल खिला सकता हूँ

तुम ग़फ़लत में हो मेरी जाँ
तुम को आज भुला सकता हूँ

तुम ने मेरे ख़त फाड़े हैं
मैं भी आग लगा सकता हूँ

नाम तेरा महफ़िल में ले कर
सबके होश उड़ा सकता हूँ

मुझ से इश्क़ नहीं करना तुम
मैं तुम को उलझा सकता हूँ

सब कहते है पागल हूँ मैं
किस को आख़िर भा सकता हूँ

वीर कहानी कैसी भी हो
मैं किरदार में आ सकता हूँ

— Ravi 'VEER'

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