har pahar har waqt mausam har ghadi tere liye | हर पहर हर वक़्त मौसम हर घड़ी तेरे लिए

  - Ravi 'VEER'

हर पहर हर वक़्त मौसम हर घड़ी तेरे लिए
जी रहा हूँ मैं यहाँ बस ज़िन्दगी तेरे लिए

दिल्लगी को छोड़ मुझको काम कुछ आता नहीं
सो यहाँ मैं कर रहा हूँ शायरी तेरे लिए

मुफ़लिसी में क़ीमती आँसू तू मत बर्बाद कर
तोड़ दे रिश्ता यही है बेहतरी तेरे लिए

थी नहीं जो ग़लतियाँ वो मान ली मैंने यहाँ
इस तरह भी है जताई सादगी तेरे लिए

और भी तो लोग होंगे यार तुझसे आश्ना
मैं भला कब तक रहूँगा आख़िरी तेरे लिए

तू कभी तो कर ज़ुबाँ से इक दफ़ा इकरार फिर
'वीर' कर लेगा सभी से दुश्मनी तेरे लिए

  - Ravi 'VEER'

Raqeeb Shayari

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