कब तक चलेंगे वो ही अफ़साने ज़माने में कहोकब तक चलेगा दौर इक तरफा मुहब्बत का यहाँकब तक मिलेगा हीर को राँझा बताओ ये मुझेकब तक सहे मजनूँ भला ग़म रंज-ए-उल्फ़त का यहाँ— Ravi 'VEER'