बरतन कपड़े रोटी पोंछा और भी क्या क्या मालिक
बोलो पाँच हज़ार में कौन करे है इतना मालिक
एक बाप उतरा है ज़िस्मफ़रोशी के धंधे में
दस घण्टों की ख़ातिर मेरा जिस्म तुम्हारा मालिक
उदास नस्लें सुनती हैं ये शे'र वगैरह जैसे
अच्छा चलना है शाइ'र का आगे धंधा मालिक
इक बेटी की अस्मत लूटी है किस के बेटे ने
बोलो होनी लड़की अच्छी या फिर लड़का मालिक
— Saahir















