Saahir
Saahir
Ghazal

बरतन कपड़े रोटी पोंछा और भी क्या क्या मालिक

बोलो पाँच हज़ार में कौन करे है इतना मालिक

एक बाप उतरा है ज़िस्मफ़रोशी के धंधे में
दस घण्टों की ख़ातिर मेरा जिस्म तुम्हारा मालिक

उदास नस्लें सुनती हैं ये शे'र वगैरह जैसे
अच्छा चलना है शाइ'र का आगे धंधा मालिक

इक बेटी की अस्मत लूटी है किस के बेटे ने
बोलो होनी लड़की अच्छी या फिर लड़का मालिक

— Saahir

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