मेरी नज़र मिलने लगी हैं छोटी लड़की से
'उम्र बीस की इक बच्ची जैसी लड़की से
मुझको भी सम्भाल सके कुछ यूँँ भी मैने
'इश्क़ किया है 'उम्र की एक बड़ी लड़की से
'इश्क़ दूर ही रहता मुझसे इक इस ज़िद में कि
'इश्क़ करूँँगा मैं गर तो सच्ची लड़की से
शे'र लिखे हैं किसके लिए नहीं पूछा दोस्त
फायदा हुआ 'इश्क़ का ये सीधी लड़की से
जिस्मबाज़ कहने वाले बता अच्छी लड़की
रूह से 'इश्क़ करूँँगा उस अच्छी लड़की से
दुश्मन हैं दोनों घर पुश्तों से और तुमको
'इश्क़ हुआ भी तो हुआ दुश्मन की लड़की से
'इश्क़ किया था इक अनजान से मैने लेकिन
शादी की है इक देखी भाली लड़की से
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