जितने होठों से ये जाती जाएगी
बात है ये उतनी ही बदली जाएगी
ज़िंदगी पहले जैसी होती जाएगी
जैसे जैसे 'उम्र ये ढ़लती जाएगी
ज़ीस्त में वो है यूँँ जैसे सहरा में पेड़
पेड़ भी वो जिसकी पूजा की जाएगी
सब लगे उसे करने में याद और मुझको
ये लगता है याद है आ ही जाएगी
ये कह ख़ुद को हर रस्ते पे मोड़ लिया
जो होगा सो होगा देखी जाएगी
वो आया है रहने को अब देखो तुम
घर से सब सेे पहले उदासी जाएगी
मकड़ी का घर देख यही सोचा मैं ने
घर में घर बना लिया मारी जाएगी
मेरी शादी के दिन मेरे अलावा एक
लड़की घर से रोती रोती जाएगी
मैने उसको अपने पास बिठाया है
देखो जेब मेरी भी काटी जाएगी
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