मेरी चाहत का ये अंजाम नहीं हो सकता
मैं तेरे शहर में गुमनाम नहीं हो सकता
वो भले लाख सितम ढाए सही लगता है
उसपे साबित कोई इल्ज़ाम नहीं हो सकता
'उम्र भर उसके ही देखे से बहकना है मुझे
अपने हाथों में कभी जाम नहीं हो सकता
मैं तिरे बाद से हर रोज़ तेरी चाहत में
इतना तड़पा हूँ कि आराम नहीं हो सकता
'इश्क़ के नाम से बदनाम तो हो सकता हूँ
'इश्क़ के काम में नाकाम नहीं हो सकता
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