
जिसे जैसा भी था उस को तो प्यारा हो रहा था
कि मैं हर हाल में माँ को गवारा हो रहा था
तुम्हें देखा नहीं था साँस तब भी आ रही थी
मोहब्बत के बिना भी तो गुज़ारा हो रहा था
— Rohit tewatia 'Ishq'
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