आता नहीं मुझ को समझ जादू ये जो उस ने किया
है ज़मज़मा करता मिरा लगता मुझे है सूफ़िया
मैं ने कभी माँगा नहीं वा'दा सनम से प्यार में
माँगे बिना पर जान का ये क़ौल उस ने कर लिया
मैं कर नहीं पाया वफ़ा उस यार से उस की तरह
ख़ातिर मिरी उस यार ने है हिज्र का भी विष पिया
हर एक मेरी बात का मतलब बना है यार वो
बे-क़द्र मैं उस के बिना वो यार मेरा क़ाफ़िया
यूँ मुझ अदम को जिस तरह उस ने बनाया है ख़ुदा
इस बंदगी का ऐ ख़ुदा कैसे करूँ मैं शुक्रिया
उस की इबादत का असर मुझ पर हुआ है इस क़दर
मुझ मुंतज़र को मुंतज़िर उस ने बना यारों दिया
— Rubball















