काँटों से फूलों सी बातें करती है

सहरा से दरिया की बातें करती है

पहले वो कितनी कम बातें करती थी
और अब तो वो कितनी बातें करती है

उस की दोनों आँखें फिर भर आती हैं
जब भी उस क़िस्से की बातें करती है

मैं उस के होंठों को तकता रहता हूँ
वो जब भी जैसी भी बातें करती है

इक लड़की है जो इकदम घर जैसी है
वो बिल्कुल माँ जैसी बातें करती है

जपती है कान्हा कान्हा ही सारा दिन
वो लड़की राधा सी बातें करती है

— Siddharth Saaz

More by Siddharth Saaz

Other ghazal from the same pen

See all from Siddharth Saaz →

Radha Krishna Shayari

Shers of radha krishna.

All Radha Krishna Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling