मैं बताता हूँ तुम्हें क्या है मोहब्बत करना
ख़ुद-ब-ख़ुद अपने दिल-ओ-जाँ की शहादत करना
ये तो तुम करना मगर देखो ये तुम मत करना
कितना आसान है औरों को नसीहत करना
मैं ने सीने से लगा कर इसे रक्खा था मगर
तुम को देता हूँ मिरे दिल की हिफ़ाज़त करना
रू-ब-रू यार के पलकें न उठीं लब न हिले
कितना दुश्वार है इज़हार-ए-मोहब्बत करना
जो भी आएगा वो दौलत पे नज़र डालेगा
कोई देखेगा नहीं आप की मेहनत करना
ख़ुद-ब-ख़ुद होती गई है मुझे आदत तेरी
मैं ने चाहा ही नहीं था तुझे आदत करना
मेरे मालिक ये दुआ है ये गुज़ारिश मेरी
वो जहाँ भी रहे तू उस की हिफ़ाज़त करना
— Saif Dehlvi















