बस एक शोर मुस्तक़िल कि मैं बहुत अजीब हूँ

सदा-फ़ुग़ाँ हर एक दिल कि मैं बहुत अजीब हूँ

अजीब हूँ तो कर रहा हूँ अपने दिल से इल्तिजा
लहू के लोथड़े न हिल कि मैं बहुत अजीब हूँ

शिकस्त ख़ुर्द हो के भी हूँ झूमता निशात से
हूँ ख़ुद ही ख़ुद से मुत्तसिल कि मैं बहुत अजीब हूँ

— Salman Yusuf

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