नहीं थी सामने लेकिन मुझे दिखाई दी
नफ़ी की ज़ेहन ने तो क़ल्ब ने गवाही दी
बताओ कौन सी मंज़िल है ये मुहब्बत की
किसी के होंठ हिले और अज़ाँ सुनाई दी
वो जिस ने ज़ख़्म दिया था बड़े तपाक के साथ
वो वक़्त आया उसी हाथ ने दवाई दी
— Salman Yusuf
नफ़ी की ज़ेहन ने तो क़ल्ब ने गवाही दी
बताओ कौन सी मंज़िल है ये मुहब्बत की
किसी के होंठ हिले और अज़ाँ सुनाई दी
वो जिस ने ज़ख़्म दिया था बड़े तपाक के साथ
वो वक़्त आया उसी हाथ ने दवाई दी
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