बिगड़ गया हूँ तो फिर से कोई मनाए मुझे
करे न बात अगर पास ही बिठाए मुझे
बची नहीं है तलब कोई भी मिरे दिल में
मैं मर गया हूँ तो वो आए और जलाए मुझे
नया सा कोई जहाँ अब कहाँ से मैं खोजूँ
जो मिल गया है वही अब कहीं बसाए मुझे
मैं थक गया हूँ हवाओं से साँस भरते हुए
वो आँधियों की तरह आए और बुझाए मुझे
न होश है न ख़बर है कोई मुझे अपनी
कोई जो हाथ मिलाए तो जगमगाए मुझे
— Sanjay Bhat















