कटी ज़ीस्त सारी अकेले अकेले
पड़ी हम पे भारी अकेले अकेले
मिला ही नहीं कोई हम को सफ़र में
सफ़र तो है जारी अकेले अकेले
सलीक़ा न आया जब उड़ने का हम को
शजर पर गुज़ारी अकेले अकेले
जलो तुम भी इस आग में साथ मेरे
हो क्यूँ बे-क़रारी अकेले अकेले
ये गुलशन ये घर और ये दुनिया हमारी
तुम्हीं ने सँवारी अकेले अकेले
— Sanjay Bhat















