ये किस का यक-ब-यक ख़याल आ गया

जो रुख़ पे तेरे फिर जमाल आ गया

गिले शिकायतें नहीं करेंगे अब
ज़बाँ पे उन के भी सवाल आ गया

कहाँ कहाँ से आ रहे हो टूट कर
ये ज़िंदगी में क्या मलाल आ गया

ख़ुदा से पूछते हैं लोग अब सवाल
कि पूछने का अब कमाल आ गया

तरस गए हैं खेत बूँद बूँद को
ये क्या कि फिर से ख़ुश्क साल आ गया

हवा के ज़ोर से सफ़र में गिर गए
अजब ये राह में ज़वाल आ गया

— Sanjay Bhat

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