"बादल और आँसू"

सीख लो बादल से आँसू को बहाना
हो न आँसू गिरने का कोई ठिकाना
वज्ह हो कोई हो कोई फिर ज़माना
ग़म न कोई हो न ख़ुद को हो मनाना
सीख लो बादल से आँसू को बहाना
अपने मातम में सभी को यूँ भिगाना
सब को ही ग़म-ख़्वार तुम अपना बनाना
सीख लो बादल से आँसू को बहाना
अपने आँसू से ज़मीं को यूँ भिगाना
दूर से ही नक़्श तुम अपना बनाना
सीख लो बादल से आँसू को बहाना
धुन सुरीली कोई बूँदों से बनाना
रोते रोते तुम भी नग़्मा कोई गाना
सीख लो बादल से आँसू को बहाना
यूँ बहा के आँसू तुम ख़ुद को मिटाना
सीख लो बादल से हस्ती को मिटाना
सीख लो बादल से आँसू को बहाना

— Sanjay Bhat

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