तराश मुझ को कि कोई मिरा सिरा निकलेसिरा दिखे जो अगर कोई सिलसिला निकलेवो सिलसिला हो तिरी मेरी ज़िंदगानी काअगर जो निकले तो हर लफ़्ज़ हर गिला निकले— Sanjay Bhat