क्या अब तलक वो एक आस बाक़ी है
इस दर्द का कोई मिरास बाक़ी है
गुल हो चुके हैं सब चराग़ अब मेरे
अब भी कहीं कोई उजास बाक़ी है
वो जा चुके जो दिल मिरा दुखाते थे
अब कौन मेरा इख़तिसास बाक़ी है
सच है कि सुब्ह-ओ-शाम बात करते हैं
पर बात जो है एक ख़ास बाक़ी है
इस के परे तो है सहर नई 'सावन'
बस एक ये ही तो अमास बाक़ी है
— Savan














