आप आने वाले हैं
हर तरफ़ उजाले हैं
रुख़ के ख़ूब-सूरत हैं
लोग दिल के काले हैं
अब से ख़्वाब आँखों के
आप के हवाले हैं
हक़ का इस ज़माने में
हम अलम सँभाले हैं
आँखें उन को मत कहिए
जाम के पियाले हैं
दिल के जिस्म में पेवस्त
बरछियाँ हैं भाले हैं
पपड़ियाँ हैं होंठों पर
पाँव में भी छाले हैं
अपनी ज़ीस्त को हम ख़ुद
मुश्किलों में डाले हैं
लाश-ए-क़ैस उर्यां है
चश्म-ए-लब पे नाले हैं
ख़ून में शजर लतपत
आज सब रिसाले हैं
— Shajar Abbas















