आप से हम दूर हैं मजबूर हैं
बा-ख़ुदा मजबूर हैं मजबूर हैं
मुख़्तसर ये है हमारी दास्ताँ
ग़मज़दा रंजूर हैं मजबूर हैं
हज़रत-ए-दिल अब नहीं चल पाएँगे
रंज-ओ-ग़म से चूर हैं मजबूर हैं
हिज्र फ़ुर्क़त ये जुदाई और फ़िराक़
'इश्क़ के दस्तूर हैं मजबूर हैं
दिल की धड़कन इतना कह के रुक गई
हम शजर माज़ूर हैं मजबूर हैं
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