hai chehra chaand sa teraa tabeeb ki beti | है चेहरा चाँद सा तेरा तबीब की बेटी

  - Shajar Abbas

है चेहरा चाँद सा तेरा तबीब की बेटी
और उसपे ज़ुल्फ़ का पहरा तबीब की बेटी

मैं इनको देखूँ तो मुझको ख़ुमार आता है
है तेरी आँखों में नश्शा तबीब की बेटी

वो जैसे चाँद की करवट में कोई तारा हो
है इस तरह तेरा झुमका तबीब की बेटी

मुझे दुआओं में माँगो ख़ुदास अपने लिए
मैं बे सबब ना मिलूँगा तबीब की बेटी

बना के क़ाफ़िया लहजा रदीफ़ हुस्न तेरा
मैं गज़लें तुझ पे लिखूँगा तबीब की बेटी

तुम्हारी सादगी अख़लाक का ख़ुदा की क़सम
मैं बन गया हूँ दीवाना तबीब की बेटी

घटाएँ गाँव में आने का बस यही है सबब
तुम्हारा ज़ुल्फ़ें हिलाना तबीब की बेटी

ग़ज़ल अधूरी है जो यार वो मुकम्मल हो
शजर की ख़्वाब में आना तबीब की बेटी

  - Shajar Abbas

Taareef Shayari

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