phool se lehje ko talwaar bhi kar saka hai | फूल से लहजे को तलवार भी कर सकता है

  - Shajar Abbas

फूल से लहजे को तलवार भी कर सकता है
ख़ुद को तू मीसम-ए-तम्मार भी कर सकता है

सुन के महफ़िल में मेरा नाम ओ हँसने वाले
मुझ से तू 'इश्क़ का इज़हार भी कर सकता है

मुझको ये हक़ है जताऊँ मैं मोहब्बत अपनी
तुझको ये हक़ है तू इनकार भी कर सकता है

ये ज़रूरी तो नहीं रू-ब-रू दीदार करे
तू मिरा ख़्वाब में दीदार भी कर सकता है

  - Shajar Abbas

Valentine Shayari

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