apni nigaah meri nazar se mila ke dekh | अपनी निगाह मेरी नज़र से मिला के देख

  - Shajar Abbas

अपनी निगाह मेरी नज़र से मिला के देख
दुनिया में जी के देख लिया मुझ
में आ के देख

मिल जाएगा जहाँ में ही फ़िरदौस का मज़ा
सीने से इक यतीम को अपने लगा के देख

मर जाऊँगा में तेरे बिना गर नहीं यकीं
तो ऐसा कर तू आज मुझे आज़मा के देख

बाक़ी रहेगी तू भी न बाकी रहूँगा मैं
शक है कोई तो ख़ुद में से मुझको घटा के देख

लूट जाएगा ये कर्या-ए-दिल सुन ऐ अजनबी
मासूमियत से तू ना मुझे मुस्कुरा के देख

सारा जहाँ करेगा तुझे याद बाद-ए-मौत
तू 'इश्क़ कर और 'इश्क़ में ख़ुद को मिटा के देख

दोश-ए-हवा पे हमने जलाकर कहा चराग़
दम है हवा जो तुझ
में तो इसको बुझा के देख

मैं फिर से जी उठूँगा मुकम्मल यकीन हैं
एक मर्तबा मुझे तू सदा तो लगा के देख

नज़रों से लूट लेता है वो दिल की सल्तनत
अंदाज़ देखने हैं तो उसकी अदा के देख

छाया के साथ होगा मय्यसर तुझे समर
आँगन में अपने एक शजर को लगा के देख

  - Shajar Abbas

Andaaz Shayari

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