haq bayaan karte hue tan se utar jaate hain | हक़ बयाँ करते हुए तन से उतर जाते हैं

  - Shajar Abbas

हक़ बयाँ करते हुए तन से उतर जाते हैं
फिर बयाँ करने को हक़ नेज़े पे सर जाते हैं

परचम-ए-इश्क़ लिए क़ैस की मानिंद जवाँ
पुर ख़तर राहों पा बे ख़ौफ़ ओ ख़तर जाते हैं

साथ तुम थे तो नहीं डरते थे तूफ़ानों से
अब तो पत्तों के खड़कने से भी डर जाते हैं

कूचा हो जाता है खु़शबू से मोअत्तर सारा
जिस भी कूचे से वो होकर के गुज़र जाते हैं

यार कुछ लोग हैं जो मर के भी जी उठते हैं
और कुछ लोग शजर जीते जी मर जाते हैं

  - Shajar Abbas

Dost Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Dost Shayari Shayari