lafz lab par saja hai may khaana | लफ़्ज़ लब पर सजा है मय खाना

  - Shajar Abbas

लफ़्ज़ लब पर सजा है मय खाना
सबके दिल की सदा है मय खाना

नोच लेना लपक के मुँह उसका
जो ये बोले बुरा है मय खाना

ग़म की रातें गुज़ारने के लिए
सबसे अच्छी जगह है मय खाना

अपनी मर्ज़ी से मैं नहीं आया
मुझको लाया गया है मय खाना

एक बशर लेके हाल-ए-अफ़सूर्दा
ढूंढता फिर रहा है मय खाना

मुझको मत ढूँढ कूचा-ए-जाँ में
अब ठिकाना मेरा है मय खाना

छोड़कर देखो महफ़िल-ए-ख़ूबाँ
मेरे दिल ने चुना है मय खाना

कोई पूछे सबा 'शजर' का पता
तो बताना पता है मय खाना

  - Shajar Abbas

Lab Shayari

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