titliyan kahti hain har gul ki ziyaarat karna | तितलियाँ कहती हैं हर गुल की ज़ियारत करना

  - Shajar Abbas

तितलियाँ कहती हैं हर गुल की ज़ियारत करना
बाग़बाँ गुलशन-ए-रिज़वाँ से मोहब्बत करना

अपने माँ बाप की उस्ताद की इज़्ज़त करना
अपनी औलाद को दिन रात नसीहत करना

ऐ मोहब्बत के पयम्बर तेरी तक़लीद में हूँ
रोज़-ए-महशर तू मेरी आके शफ़ाअत करना

बिन बुलाए नहीं होना कहीं ख़ुशियों में शरीक
हाँ मगर ग़म में हर इक शख़्स के शिरकत करना

मदफ़न-ए-हज़रत-ए-फ़रहाद से आती है सदा
मुनकिर-ए-इश्क़ से हर वक़्त ही नफ़रत करना

दरमियाँ 'इश्क़ के आ जाए क़बीला जो कभी
तुम पे वाजिब है क़बीले से बग़ावत करना

ख़्वाब अपने तेरी आँखों में यूँँ छोड़ आया हूँ
है ग़लत बात अमानत में ख़यानत करना

फ़स्ल-ए-गुल आई है सय्याद निकल आए हैं
मेरे माबूद परिंदों की हिफ़ाज़त करना

इब्ने आदम है तुम्हें हज़रत-ए-आदम की क़सम
बिंत-ए-हव्वा की हर इक दौर में इज़्ज़त करना

हाकिम-ए-वक़्त सज़ा देने से पहले ये बता
क्यूँ ग़लत है किसी अफ़राद की चाहत करना

हज़रत-ए-दिल चलो मैदान-ए-मोहब्बत में चलो
नोश चलकर के वहाँ जाम-ए-शहादत करना

है शब-ए-क़द्र के मानिंद शब-ए-वस्ल शजर
आज की शब में तहेदिल से इबादत करना

  - Shajar Abbas

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