yuñ saari duniya se nafrat mitaata rehta hooñ | यूँँ सारी दुनिया से नफ़रत मिटाता रहता हूँ

  - Shajar Abbas

यूँँ सारी दुनिया से नफ़रत मिटाता रहता हूँ
शजर ख़ुशी के मैं हर सू लगाता रहता हूँ

उदास देख के मुझको कोई उदास न हो
ये बात सोच के मैं मुस्कुराता रहता हूँ

कहीं अँधेरा न हो जाए शहर-ए-हमदम में
मैं बस ये सोच के दिल को जलाता रहता हूँ

बा नाम-ए-हज़रत-ए-शब्बीर दिल के आँगन में
मैं फ़र्श-ए-मजलिस-ओ-मातम बिछाता रहता हूँ

कोई तो आके मेरे साथ ग़म को बाँटे शजर
फिराक़-ए-यार मैं तन्हा मनाता रहता हूँ

  - Shajar Abbas

Shajar Shayari

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