ज़माने भर में नफ़रत रह गई है
सियासत ही सियासत रह गई है
मेरी बर्बादियों में सब हैं शामिल
तुम्हारी सिर्फ़ शिरकत रह गई है
इरादा कर चुका हूँ ख़ुदकुशी का
फक़त तेरी इजाज़त रह गई है
मैं गुल की पत्तियाँ चूमूँ लबों से
मेरे दिल में ये हसरत रह गई है
ज़माने भर को इन आँखों ने देखा
बस इक तेरी ही सूरत रह गई है
जहाँ कल तक थी ख़ुशहाली वहाँ पे
महज़ वहशत ही वहशत रह गई है
मोहब्बत जिस्मों का इक खेल है अब
मोहब्बत कब मोहब्बत रह गई है
शिकायत करना अब तुर्बत पे आकर
अगर कोई शिकायत रह गई है
जुदाई बरसों पहले हो चुकी है
दिलों में फिर भी चाहत रह गई है
शजर सब छोड़ दीं हैं आदतें अब
हाँ बस सिगरेट की आदत रह गई है
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